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गंगाराम और स्नेहा Ch. 07

Story Info
गंगाराम और गौरी की चुदाई की दास्ताँ ।
2.6k words
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Part 7 of the 12 part series

Updated 11/29/2023
Created 06/03/2022
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गंगाराम और गौरी की चुदाई की दास्ताँ ।

जैसे ही गौरी गंगाराम की कमरे में प्रवेश करि; गंगाराम के लंड का तनाव उसके लुंगी में अब उभार बनाने लगा था जो गौरी की आंखों से भी छिपा नही था।

इस कमरे में अने के एक घंटा पहले ही वह गागरम के यहाँ आई थी। उस दिन उसने बदन को खूब घिस घिस कर स्नान करि और और वहां के बालों को साफ करि। गंगाराम की दिए हुई महँगी वाली कॉटन साड़ी और उस से मैचिंग करती ब्लाउज पहनी, अपने बालों को जुड़ा बनाकर उस पर जाली (net) चढ़ाकार चंपा के माला जुड़े की में फिरोई, थोडासा मेकअप करि और अपने को आईने में देखि थो वह खुद अपने आपको पहचान नहीं पायी। गौरी का तो पूरा काया कल्प होगया।

"ओह... माँ.. तुम कितनी सुन्दर हो... जमाना होगया तुमको ऐसे देख कर.." उसकी बेटी स्नेहा कही और माँ के गाल को जोर से चूमली।

स्नेहाने ही ऑटो बुलाकर माँ को ऑटो में बिठाई और एड्रेस बोली। गौरी में उत्तेजना के साथ टेंशन भी हो रहा था। आज वह चुदाने जा रही है... इस ख्याल से ही उसकी चूत खूब उभर चुकी है और सुर सूरीसी होने लगी। वह सोच रही थी की गंगाराम उसे देखते ही उसे जोर से दबोचेगा और ताबड़ तोड़ चूमना शरू कर देगा...

लेकिन जैसा वह सोची थी वैसा नहीं हुआ; बहुत ही जेंटलमैन की तरह बिहेव किया। वैसे गंगाराम था तो गौरी की इंतजार में ही। लेकिन जब वह ऑटो से उतरी तो उसे आश्चर्य से देखते पुछा.."आप..."

"भाईसाब में हूँ गौरी..." वह बोली तो...... "ओह माय गॉड...गौरी जी आप.. मैं तो आपको पहचाना ही नहीं.. माय गॉड कितने सुन्दर हो आप.. आईये आईये.." वह उसे अंदर बुलाया और सोफे पर बैठने को कहा।

"गौरी सोफे पर बैठते बोली "भाईसाब आप मुझे 'जी' मत कहिये.. आप मुझसे बड़े है, ऐसा बोलने से, मुझे कुछ अजीब सा लगता है..."

"फिर क्या बोलूं..."

'गौरी कहिये... 'जी' मत लगाइये.. और 'आप' मत कहिये;" वह कुछ लजाते बोली।

फिर दोनों एक दूसरे की कुशल मंगल पूछे। गंगाराम गौरी के घर के बारे में और बच्चों के बारे में तो गौरी ने भी उसके बेटों, और बहुओं के बारे में पूछी। तब तक दो पहर के एक बज चुके थे। गंगाराम ने बाहर से खाना मंगाया था तो दोनों उसे खलिये और उसके बाद गंगराम ने उसे एक कमरा दिखाकर उसे आराम करने को बोला। वह अपने तरफ से कोई जल्दबाजी नहीं की है, उसे मालूम है की वह आई हि उस काम के लिए....

गौरी कमरे गयी और बेड पर गिरि.. मखमली गद्दी में वह घांस सी गई। वह सोच रही थी की गंगाराम आएगा, लेकिन वह नहीं आया। 15, 20 मिनिट तक भी वह नहिं आया तो गौरी हीं ऊपर उसके कमरे की तरफ चल पड़ी। जाने से पहले उसने अपनी ब्रा खोलकर गयी। जैसे ही वह गंगाराम के कमरे मे अंदर गयी....

जैसे ही गौरी गंगाराम की कमरे में प्रवेश करि; गंगाराम के लंड का तनाव उसके लुंगी में अब उभार बनाने लगा था जो गौरी की आंखों से भी छिपा नही था।

गौरी अपना ऐसा जोरदार स्वागत देखकर खुश हो गयी, वह सोची नहीं थी की ऐसा स्वागत होगा। अब उसकी हवस में और भी इजाफा हो गया, वो तेज़ कदमो से आगे बढ़ते हुए गंगारम के पास जा पहुंची, और इससे पहले की गंगाराम कुछ बोल पाता, गौरी उसके होंठों पर टूट पड़ी, ऐसा लग रहा था की वो पागल सी हो चुकी है, अपनी मुम्मों को गंगाराम छाती पर दबाते, रगड़ते हुए वो उससे चिपक सी गयी। गंगाराम भी उसे अपने बाँहों में जकड़ा और अपने होंठ गौरी कि तपते होंठों पर लगाया। गौरी पागलों की तरह गंगारम के होठों को बुरी तरह से चूस रही थी।              

गांगराम ने भी इस मौके को न चूकने को सोचते गौरी को अपनी बाहों में भरकर अपने हाथों से उसकी गदरायी गांड को सहलाना शुरू कर दिया। अब उसे पता चला की गौरी कितना गरमा चुकी है; उसने गौरी के साड़ी के ऊपर से ही उसके गांड के दरार में अपनी उंगलियाँ उसकी गांड की दरार में उतार दी..             

"आआआआअहहsssssssss भाई...सा....बsssssssssssssssss.. उम्म्म्मममममम," कही।

उसकी थर थराती हुई सी आवाज़ ने गंगाराम के अरमानो को और भड़का डाला, और उसने गौरी को बेड पर चित लिटाकर अपना मुँह सीधा गौरी के बड़ी बड़ी मुम्मों पर रख दिया और साड़ी हटाकर ब्लाउज के उपर से ही उसकी ब्रेस्ट पर लगे दाने को मुँह में लेकर चूसने लगा.. जैसे ही ब्रेस्ट उसके मुहं में आयी वह जान गया की गौरी ने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी।

"ऊऊऊऊऊऊओह भाई सा.सा सा ..ब ... माई डार्लिंग ...... उम्म्म्मममममममम,..." कही। अब वह भी गंगाराम को माई डार्लिंग.." कही और लाज से उसकी छाती में अपना मुहं छुपाली।

गंगाराम ने गौरी की चूची कि चुचुक को होंठों से पकड़ते ही गौरी की सारा शरीर झन झाना उठा। अब वह खुद अपनी ब्लाउज खोलकर अपनी नंगी ब्रेस्ट गंगाराम के मुँह में ठूस दी..।

गंगाराम के यह पहला मौका था उसके लिए, उसने जी भरकर उन प्यारी, प्यारी सी चूची को देखा और फिर धीरे धीरे अपनी जीभ से उन चट्टानों को चाटने लगा।             

उसकी खुरदरी जीभ जैसे जैसे अपने वक्ष को चाट रही है, गौरी मे आग धधक रही थी गंगाराम के सर को अपने दुद्दुओं पार दबते गौरी ने ज़बरदस्ती अपना एक मुम्मा उसके मुँह में ठूसा और ज़ोर से चिल्लाई .. "काटो.. भाई सब.. जोर से काटो.. आआआह्ह्ह्ह बाईट करो भाईसाब.... खा जाओ इनको ..."

गंगाराम तो ऐसी गर्म औरत को पाकर अपने आपको खुश किस्मत वाला समझने लगा, उसने तो सोचा भी नही था की ऐसी साधारण दिखने और रहने वाली औरत बेड पर इतनी गर्म होगी। उसने धीरे- धीरे गौरी के साड़ी और पेटीकोट उतार कर साइड में फेंक दी, ब्लाउज तो गौरी खुद खोल चुकी थी, अब वो बिस्तर पर पूरी नंगी पड़ी थी, और गंगाराम भी पलक झपकते ही नंगा हो गया।

गौरी ने अपने आक्रमण करि के लंड की तरफ देखी और शरमाते हुए अपनी नज़रें झुका ली, 'हाय रे इतना बड़ा...' वह सोचने लगी।

वह नंगी लेटी गौरी के पास पहुँचा और अपने लंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया, उसकी मुट्टी में वह बहुत गर्म महसूस करि। उत्तेजना और गभरहट से उसे उपर नीचे करने लगी..फिर गंगाराम ने उसके सिर पर हाथ रखकर उसे नीचे जाने के लिए कहा, उसने गौरी के मुंह का निशाना साधकर अपना लंड सीधा इसके प्यारे से मुंह मे डाल दिया, वह भी किसी बेहतरीन खिलाड़ी की तरह गंगाराम के लंड को जोर जोर से चूसने लगी, जल्द ही उसका लंड अपनी पूरी औकात में आ गया, और वो पूरी तरह तनकर गौरी के गले की गहराइयों को नाप रहा था।

तकरीबन 10 मिनट तक गंगाराम अपना लिंग उससे चुसवाता रहा, अचानक उसे लगा कि वो झड़ने वाला है, पर वो ये नही चाहता था कि वो गौरी की चुदाई करने से पहले झड़े, इसलिए उसने तुरंत अपना लंड गौरी के मुंह से निकाल लिया।

गौरी को ऐसा लगा जैसे उसका प्यारा सा खिलौना किसी ने छीन लिया हो, उसने हसरत भरी निगाहों से गंगाराम की ओर देखा, और पूछी "भाईसाब, आपने ऐसा क्यों किया?"

"मैं पहले तुम्हारी बुर को चोदकर उसमे झड़ना चाहता हूँ..." कहा।

अगले ही पल गंगाराम ने उसे पकड़कर उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और फिर उसकी टांगे चौड़ी करके उनके बीच लेट गया..अब उसकी आँखो के सामने थी गौरी की, अपने पति से खूब चुदी चूत थी। उसकी चूत खूब उभरी और सफाचट थी, लगता है वह यहाँ आनेसे पहले ही साफ की हो। गंगाराम ने धीरे से अपनी जीभ को उसकी भाप छोड़ती चूत से टच करवाया.....।

गंगाराम को ऐसा लगा जैसे उसने किसी गर्म मलाई से भरे डिब्बे में मुँह डाल दिया है....गरमा गरम मलाई के साथ साथ गर्म हवा के भभके निकल रहे थे उसकी चूत में से..

जैसे जैसे वो गौरी की चुत को चूस रहा था...वैसे वैसे गौरी की सिसकारियाँ भी तेज होती जा रही थी...ऐसा लग रहा था जैसे गंगाराम अपनी जीभ और दाँतों से उसके जिस्म पर कब्जा करता जा रहा है और वह अपने होशो हवस खोकर पागलों की तरह चिल्लाती जा रही थी.

आआआआआआआआहह..........मा..आआआआआअ,,र डालोगे आप तो.........आआआआआअहह एसस्स्स्स्स्स्स्सस्स भाईसा...ब ... चाटो ....सक्क मि.... ईीईईईईईईईईईईईईई....और ज़ोर से........उम्म्म्ममममममममममममम bhaaaaaai sssaaaaabbbb ....आआआह "

और एक वक़्त तो ऐसा आया की गौरी ने उसके सिर को ज़ोर लगाकर दूर हटाने लगी...शायद उसकी चूत को चूसते हुए वो उसे झड़ने के उस मुकाम तक ले आया था जिसके बाद जरा सा टच भी संवेदन शील लगता है, और आखिर में आकर जो सेंसेशन महसूस होता है, वो गौरी को होने लग गया था.. ऐसे सेंसेशन और उत्तेजना पाकर तो उसे सालों गुजर गए।

गंगाराम अपने में ठान कर बैठा था की आज वो गौरीकी चूत की गर्मी को पूरी तरह से दूर करके रहेगा, इसलिए वो भी अपना काम कंटिन्यू करता रहा...चूसता रहा गौरी की बिना बालों वाला गर्म चूत को...अपने होंठों के बीच उसके निचले लिप्स को दबाकर जोरों से स्मूच करता रहा ...और तब तक करता रहा जब तक गौरी की आँखे नही फिर गयी...वो बेहोशी जैसी अवस्था में पहुँच गयी, अत्यधिक उत्तेजना के शिखर तक पहुँचकर ....और उसी बेहोशी में जब वो झड़ी तो उसके शरीर में ऐसे कंपन हुआ जैसे उसके शरीर पर कब्जा की हुई कोई आत्मा बाहर निकल गयी हो...और जोरदार तरीके से झड़ने के बाद वो निढाल सी होकर नीचे गिर पड़ी.

"आआआआआआआआहह ...... म्म्म्मममममममममम .. मेरे राजा आआअह्ह्ह ......"

गौरी उसकी टांगे को पकडे अपनी चूत में भाईसाब डुबकी लगाते हुए देखने लगी। गंगाराम ने अपने होंठ खोलकर उसकी चूत को पूरा अपने कब्ज़े में ले लिया और उसके साथ फ्रेंच किस्स करने लगा..इतना मज़ा मिल रहा था उसे, बड़ी भीनी - भीनी सी महक आ रही थी उसकी चूत से, गंगाराम ने अपनी जीभ को जितना हो सकता था बाहर निकाला और उसकी चूत की परतें खोलकर जीभ को अंदर धकेल दिया..

गौरी को लगा जैसे कोई खुरदरी नुकीली चीज़ उसके अंदर जा रही थी, वो सिसक उठी, और अपनी टांगे उसने गंगाराम की गर्दन में लपेट कर उसे बुरी तरह से जकड़ लिया, जैसे कुश्ती (wretsling) चल रही हो दोनों के बीच....

गंगाराम ने अपना मुँह गौरी की जांघों से बाहर निकाला और बोला: "कैसा लग रहा है जानेमन ..."

अत्यधिक् उत्तेजित गौरी ने बेड की चादर को पकड़ा और चिल्लाई "आआआआआआअहह भाई साब ... उम्म्म्ममममममममममम.. बहुत अच्छा .. मजा आ रहा है...... और करो...."

गंगाराम फिर से उसकी चूत की खुदाई करने में जुट गया.. और कुछ ही देर में उसने अपने मुँह से उसकी चूत को पूरा सींच दिया, अब वो समझ गया की अब गौरी अगले कदम के लिए तैयार है ..

वह थोड़ा उपर उठा और घुटनो के बल बैठ गया, उसकी नज़रो के सामने गौरी की रसीली चुत पानी और थूक में लथपथ होकर चमक रही थी, गंगाराम से अब बर्दास्त करना मुश्किल था, इसलिए उसने अपने रॉड की तरह सख्त हो चुके लंड को पकड़ा और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा।

गौरी को ये अहसास बहुत भा रहा था, उसकी सांसे भारी होने लगी थी, इधर गंगाराम लगातार अपना लंड उसकी रसीली चुत पर रगड़ रहा थ। गौरी से अब बर्दास्त नही हुआ और वो खुद ही बोल पड़ी, Bhaaaaai Saaaaab आआआ प्लीज़ अब डाल दीजिए आपका ये मूसल लंड मेरी चुत में, उड़ा दीजिये मेरी चुत की धज़्ज़िया, प्लीज़ मेरे राजा.. माय डार्लिंग जल्दी कीजिये अब देर न करो..."              

गंगाराम ने भी अब उसे और तड़पाना ठीक नही समझा और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चुत के छेद में फंसाया और हल्का सा धक्का मारकर अंदर दाखिल हो गया।             

"आआआआअहह उन्ह्ह्ह्ह...ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़... ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"

ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह भैय्या ssssss....भैय्या..ssssssss... करो प्लीज भैय्याययययययआआआ.."

गौरी के इतना कहने की देर थी की गंगाराम ने एक जोरदार झटका मारा, और उसका 9 इंच से भी बड़ा लंड गौरी लार टपकती चूत के अंदर पूरी तरह दाखिल हो गया..

"आआआआआआययययययययययीईईईईईईईईईईईई .... मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी ...... अहह ," वो दर्द से बिलख उठी, हालांकि उसकी चूत खूब चुदी थी लेकिन सालोंसे कोई जोतने वाला नहीं था तो वह बंजर बन तंग हो चुकी है; इसी लिए वह दर्दसे चीख पड़ी।

उसकी बेटी स्नेहा से सुनी बातोंसे गंगाराम समझ गया की गौरी की तंग होगी; लेकिन इतना टाइट होगी यह नहीं सोचा था। गंगाराम थोड़ा सा रुक गया, गौरी को सच में थोड़ा दर्द हो रहा था,..पर उसके गधराये नंगे जिस्म की सुंदरता देखकर गंगाराम का लंड बागी सा हो गया..उसने सोच लिया की आज तो कम से कम 3 - 4 बार वो उसकी चुदाई करेगा।

कुछ समय रुक कर वह फिर से शुरू होगया।

अब गंगाराम, गौरी की चुत में ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा, हर धक्के में उसका हलब्बी लंड गौरी की चुत की जड़ तक पहुंच जाता, अपनी चुत की इस जबरदस्त कुटाई से उस औरत के जिस्म में लगातार सिहरन सी पैदा हो रही थी, और उसकी चुत लगातार पानी बहा रही थी, गौरी की चुत से निकल रहे पानी की वजह से गंगाराम का लंड चिकना होकर सरपट गौरी की चुत की गहराइयों को नाप रहा था; दोनों एक दूसरे में पूरी तरह मगन होकर जोर जोर से आहे भर रहे थे, क्योंकि उन्हें पता था; इस समय वहां आनेवाला कोई नहीं है और न वह डिस्टर्ब होंगे; इसलिए वो दोनों दुनिया से बेखबर होकर दमदार चुदाई में लगे पड़े थे।

"आआह्ह्ह... स्स्स्सस्म्ममं... यह.. चोदो मुझे उफ्फो... बहुत खुजली हो रही है मेरे चूत में ,,,और जोर से.. जोर से.... बस...पेलो..." गौरी उत्तेजना में चिल्लाई जा रही थी। उसे ऐसा लग रहा है जैसे वह स्वर्ग में विचर रही हो... अपने दोनों पैरों को उसने गंगाराम के कमर के गिर्द लपेटी, और उसे अपने ओर दबाने लगी।

"गौरी.. माय डार्लिंग.. वाह क्या चूत है तुमहारी अभी भी इतना तंग है.. जैसे कुंवारी लड़की की... लो.. अब आ रहा है मेरा शॉट.. यह.." कहते गंगाराम भी शॉट पे शॉट दे रहा था।

"हाँ... भाई साब हाँ..बस पेले जाओ अपना मुस्सल मेरी चूत में.. उफ़ कितना बड़ा है आपका ....मेरी बच्चेदानी को टच कर रही है..." वह जोश मे आकर बड़ बडाते उसके लंड को और अंदर लेने केलिए अपना गांड उछाल रही थी।

जैसे जैसी गंगाराम के शॉट पे शॉट दिए जा रहा था गौरी का चिल्लाना भी बढ़ रहा है,,,

"भाई साब ...... आअह्ह्ह ... मेरी होने वाली है.. हहा..में झड़ने वाली हूँ.. मारो.. शॉट.. और जोरसे.. अहह चोदो ओओओओओओ fuckkkkk meee ...ईईईईई गयी..यी..यी..यी" वह कही और उसका शरीर एक झटका लिया और फिर वह निढाल होकर पड़ी रही। तब तक वह तीन बार झाड़ चुकी थी।

गंगाराम भी अब और दूर नहीं था.. जैसे ही वह बोली की खललस हो रही है उसने अपना लंड को और जोरसे अंदर पेले जा रहा था। ऐसे ही धमसान चुदाई और पांच मिनिट करा और वह भी अपने गर्म वीर्य उसकी तपती भट्टी मे भरने लगा। अब दो जिस्मों गर्मी अब शांत पड रही है। उसके आखरी बूँद भी गौरी चूत में गिरने का बाद वह भी उसके ऊपर शिथिल पड गया।

ऐसा ही गंगाराम और गौरी ने उस शाम तक तीन बार चुदाई कर चुके है। और हर बार गौरी कम से कम दो बार झड़ी। गौरी तो गंगाराम की लंड की दीवानी बन गयी। तीन बार चुदाई और एक बार अपने मुहं में लेकर चूस चूस कर उसे निचोड़ी। फिर भी उसका मन नहीं भरा।

वह फिरसे चुदाने के लिए इतना आतुर थी की वह पूछ ही बैठी "भाई साब फिर कब...?"

"जल्द ही.. मुझे भी दिल नहीं भरा है.. एक बार मौका निकालो.. दो तीन दिन यहाँ रहने की.. खूब मजा लूटेंगे" वह कहा।

गौरी से हामी भरी और उसे बहुत ही उदास मानसे विदा ली है।

एपिसोड जरा लम्बा होगया... इसीसलिए मैंने इस एपिसोड को दो भागों में बनायीं है। पाठकगण कृपया मुझे क्षमा कीजिये।

तो कैसी रही गंगाराम और गौरी की चुदाई। मेरा उम्मीद है की आपको पसंद आया होगा। आपकी राय जो भी हो कमेंट करके बताना न भूले।

Thanks for reading.

अगली एपिसोड का इंतजार करना।

आपकी

स्वीट सुधा 26

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